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गोरखनाथ मन्दिर

गोरखनाथ मन्दिर, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर में स्थित है। बाबा गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा है। गोरखनाथ मन्दिर के वर्तमान महन्त श्री बाबा योगी आदित्यनाथ जी है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर यहाँ एक माह चलने वाला विशाल मेला लगता है जो 'खिचड़ी मेला' के नाम से प्रसिद्ध है

इमामबाड़ा

गोरखपुर में यहां मौजूद है सोने-चांदी की ताजिया, 300 साल पुराना है इसका इतिहास ... ऐसी ही एक धरोहर शहर के मियां बाजार क्षेत्र में स्थापित इमामबाड़ा है जहां रखे सोने और चांदी के आदम कद ताजिया की पहचान दुनियाभर में है। दुनिया के और किसी इमामबाड़े में आदम कद के सोने और चांदी की ताजिया मौजूद नहीं है

हनुमानगढ़ी

महानगर के लाल डिग्गी पार्क के पश्चिम की ओर हावर्ड बांध पर थोड़ी दूर पर बाय तरफ नीचे के रास्ते से इस प्राचीन विरासत में पहुंचा जा सकता है 1819 में इस विरासत का निर्माण किया गया था परंतु जमाने के उतार-चढ़ाव ने इसे नष्ट कर दिया था इसकी पुरानी लकड़ी का विशाल खूबसूरत द्वार जर्जर हो गया था जिसे कुछ दिनों पहले मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है|

गोरखपुर रेलवे जंक्शन

रेलवे द्वारा भारतीय रेलवे के सबसे स्वच्छ रेलवे स्टेशनों की सूची जारी कर दी है. राजस्थान के जोधपुर और मारवाड़ रेलवे स्टेशन ने इसमें पहला स्थान हासिल किया है. वहीं, दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म के मामले में देश के प्लेटफॉर्म की कोई सानी नहीं है. उत्तर प्रदेश का गोरखपुर रेलवे रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म है| विश्व का सर्वाधिक लम्बा प्लेटफॉर्म यहीं पर स्थित है।

गीता प्रेस गोरखपुर

गीताप्रेस या गीता मुद्रणालय, विश्व की सर्वाधिक हिन्दू धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के शेखपुर इलाके की एक इमारत में धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन और मुद्रण का काम कर रही है। इसमें लगभग २०० कर्मचारी काम करते हैं।

सूर्यकुंड धाम

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के सूरजकुंड धाम में हर साल की तरह इस साल भी दीपावली के दूसरे दिन रविवार को दीपोत्सव का आयोजन किया गया। संस्कार भारती द्वारा आयोजित इस आयोजन में सरोवर पर हजारों दीपों ने जमीन पर सितारों के उतरने का अहसास कराया।

मोती जेल

मोती जेल आज भले ही आबाद हो गया है लेकिन जंग-ए-आजादी के दौरान इधर आने वालों के रूह कांप जाते थे। यह ठीक-ठीक कोई नहीं बता पाता। सन् 1857 के बाद इस इमारत का उपयोग सरकारी जेलखाने के रूप में किया जाता था|

मगहर सुरंग

सत्रहवीं शताब्दी में संतकबीरनगर के संस्थापक एवं चकलेदार यानी प्रशासक काजी खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद से मगहर तक सुरंग का निर्माण 1680 में कराया था। ... यह सुरंग 9 किमी लंबी और 20 फीट चौड़ी और 10 फीट ऊंची है|

मुबारक खान शहीद का मकबरा

सन 1074 ई में बाबा मुबारक शाह की मजार बनाई गई सन 1029 ई मैं बाबा का जन्म अजमेर शरीफ मैं हुआ था सैयद सालार मसूद गाजी इन को बहुत मानते थे उन्हीं के कहने पर वह गोरखपुर आए प्रेम और भाईचारा का संदेश दिया 29 वर्ष की आयु में ही यही परवाह शहीद हुए थे यह आस्था का केंद्र है |

सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक खाकी बाबा का समाधि

महानगर के बस्तर क्षेत्र बैंक रोड के चक जलाल में स्थित है आज से लगभग 300 साल पहले जब यह इलाका जंगल था औलिया फटकार सैयद रोशन अली शाह के प्रार्थना पर बाबा का चित्रकूट से गोरखपुर आगमन हुआ बाबा 12 वर्ष तक चित्रकूट में तुलसी गुफा में तक किए थे|

सैंट जॉन्स चर्च

सन 1831 में लार्ड बेटिंग तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल द्वारा 200 बीघा जमीन रेवरेंट विलकिंग्सन को दिया इसी जमीन पर ईसाई समुदाय द्वारा खेती किए जाने लगा यह जमीन आज बसारथपुर के नाम से जाना जाता है1835 में ईसाई समुदाय द्वारा बसारथपुर में सैंट जॉन्स चर्च का निर्माण किया गया जो कि अपनी माता के कारण आकर्षण का केंद्र है |

अतीत का गौरव मानसरोवर

गोरखनाथ के निकट मानसरोवर 10 वीं शताब्दी के थारू राजा राठौर मानसिंह ने बनवाया मानसरोवर के निर्माण के समय एक कार्य पत्थर का प्राचीन शिवलिंग मिला थात्रिशूल तथा पार्वती मंदिर तथा दो सतीस्थल है | उसका नाम मानसरोवर शिव मंदिर है जो अधियारी बाग क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर का संरक्षण गोरखनाथ मंदिर द्वारा ही होता है।

सेन्ट एंड्रूस चर्च

सन 1898 में बंगाल एवं नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे कंपनी द्वारा कौवा बाग रेलवे कॉलोनी में सेंट एंड्रयूज चर्च बनाया गया यह श्रद्धा का केंद्र होने के साथ से वास्तु कला का विशिष्ट नमूना है |

बसियाडीह देवी का स्थान

यह देवी अस्थान डोमिनगढ़ रेलवे स्टेशन के लाइन उस पार स्थित है 1663 में श्रीनेत राजाओं द्वारा स्थापित की गई की आराध्य देवी की मंदिर है यहां शीतला माता अन्नपूर्णा देवी मां काली मां दुर्गा के साथ अनेक देवी देवताओं के मंदिर है

शाही जामा मस्जिद उर्दू बाजार

सन 1680 मैं ही औरंगजेब के पुत्र मुलायम शाह शिकार खेलने गोरखपुर आए तब उन्होंने इस शाही जामा मस्जिद की तक्सीम करवाई और उसी समय गोरखपुर का नाम बदल कर मोजामाबाद रखा गया परंतु 1801 में पुनः ईस्ट इंडिया कंपनी ने सरकारी कामकाज के गोरखपुर नाम का प्रचलन करवाया विशिष्ट कार्य शैली के कारण आज आकर्षण का केंद्र है |

जैन मंदिर

गोरखपुर नगर के आर्य नगर में स्थित जैन मंदिर अत्यंत प्राचीन है जनश्रुति के अनुसार यह मंदिर 250–300 साल पुराना है पहले यह मंदिर निचले हिस्से पर लघु आकार का था बाद में इसका निर्माण ऊपरी तल पर किया गया मंदिर पर लिखे विशाल पत्र के अनुसार माघ बदी 5 संवत 1910 (ईसवी सन 1853) में निर्माण हुआ इस मंदिर में जैन धर्म से संबंधित धर्म धर्म व पुस्तके हैं तथा एक धर्मशाला भी है|

बंगाली काली बाड़ी

सन 1786 ई० मैं श्री सुरेंद्र नाथ सान्याल मुगल फौज के सिपहसालार थे गोरखपुर के प्रवास के दौरान एक पाकर के पेड़ के नीचे से इस मूर्ति को प्राप्ति के पश्चात वह नौकरी से इस्तीफा देकर काली मां के उपासना में लीन हुए यह मूर्ति काली कसौटी पत्थर की है कहा जाता है कि मूर्ति पाल कालीन है उन्होंने शामरूफ की दी हुई जगह में 1786 में कालीबाड़ी की स्थापना की |

राधा कृष्ण मंदिर

अलीनगर बाजार में स्थित राधा कृष्ण मंदिर जोकि गोरखपुर के प्राचीन मंदिरों में शामिल है लगभग ढाई सौ साल पुराना है मंदिर यद्यपि अपनी प्राचीनता के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है परंतु मंदिर की भव्य वास्तुकला स्थापित भव्य मूर्तियां तथा मंदिर के प्रांगण में स्थित अन्नपूर्णा देवी मंदिर तथा नर्वदेश्वर मंदिर अपनी प्राचीन वास्तु कला के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है|

विष्णु मंदिर की प्राचीन मूर्ति

मेडिकल कॉलेज रोड पर भव्य मंदिर है जिसमें 12वीं शताब्दी की पाल कालीन कसौटी पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है इस प्रतिमा को अंग्रेज लंदन के संग्रहालय में ले गए थे रानी साहब मझौली श्रीमती श्यामसुंदर कुमारी पत्नी स्वर्गीय राजा कौशल किशोर प्रसाद ने मुकदमा जीतकर प्रतिमा भारत वापस मंगवाया 8 मई 1922 को मंदिर की स्थापना की |

प्राकृतिक विरासत रामगढ़ ताल

7 वर्ग किलोमीटर में फैला यह विस्तृत जलाशय नगर वासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है नगर की जनसंख्या की वृद्धि के कारण स्थान में अवैध कब्जे बढ़ने लगे इसके विकास के लिए एक योजना बनाकर केंद्र सरकार को भेजा और सरकार ने केंद्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत सुंदर झील पर्यटकों को आकर्षित करने योग्य बनवा रही है|

मंडल कारागार

1895 मिनट निर्मित जिला कारागार आज हमारी विरासत के रूप में है 1925 में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में काकोरी कांड हुआ इसी जेल में 18 दिसंबर 1927 को उनसेउनके माता पिता का अंतिम मिलन हुआ माता ने कहा हे पुत्र तुम्हारे जैसे वीर पुत्र तो सौभाग्य से प्राप्त होते हैं आज मैं बहुत खुश हूं तुमने मेरे दूध की लाज रख ली 19 दिसंबर सन 1927 को प्रातः 6:00 बजे उन्होंने वंदे मातरम और भारत माता की जय के धोनी के साथ फांसी के फंदे को चूमा|

राजकीय उद्यान पार्क

सन 1895 में बनाया हुआ शहर के सबसे शांत इलाके में 35 एकड़ में स्थित हरियाली से भरा या पार पर्यटकों के लिए मनोरंजन का स्थल है जो शहर की एक प्राकृतिक विरासत दी है इस पार्क में सन 1923 में रुद्रपुर के पास अलार्म्स गांव से सटे एक प्राचीन मंदिर के भगवान शिव से प्राप्त विशालकाय विष्णु जी की मूर्ति तथा सूर्य की मूर्ति इस पार्क में रखी हुई है यह मूर्तियां गुप्तकालीन 320 से 550 ईसवी के आसपास की है एक काले माला और स्टोन की बनी हुई है |

जटाशंकर गुरुद्वारा

15.04.1469 को जन्मे सिक्खों के प्रथम गुरु नानक देव जी विभिन्न स्थलों की तीन बार परिक्रमा करके भगवान के गुणों को नए रूप में प्रस्तुत करते हुए सिख धर्म की स्थापना की और सिख धर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचाया | उन्होंने अपनी प्रथम यात्रा संघ 1512 इसमें में अयोध्या से गोरखपुर आए और इसी गुरुद्वारा के स्थान बैठारे और अपने संदेशों को प्रचार किया उन्होंने कई योगियों कोशिश से बनाया |

नगर निगम बिल्डिंग(टाउन हॉल)

विक्टोरियन युग की वास्तुकला की और प्रीतम निशानी जिसमें की वर्तमान में नगर निगम कार्यालय स्थित है का निर्माण 1899 में हुआ था नगर के मध्य में हरियाली से गिरा हुआ या भवन आज भी अपनी भव्यता के कारण आकर्षण का केंद्र है हालांकि भवन के सामने स्थापित विक्टोरिया की मूर्ति की जगह रानी झांसी की मूर्ति स्थापित कर दी गई |

नगर निगम पुस्तकालय

नगर निगम परिसर परिसर में आकाशवाणी के सामने यह पुस्तकालय स्थित हैं 1925 में अम्मान जो अम्मान सभा के कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा स्थापित किया गया था आए लगभग 13000 पुस्तकें इस पुस्तकालय में उपलब्ध है इसका भवन भी वस्तु कला का अनुपम उदाहरण है |

प्रेमचंद्र निकेतन

बेतियाहाता स्थित मुंशी प्रेमचंद पार के 1903 में निर्मित इस घर में प्रख्यात कथाकार मुंशी प्रेमचंद 1916 से 1921 तक रहते थे 15 फरवरी 1921 को गाजी मियां के मैदान में महात्मा गांधी के भाषण से प्रेरित होकर उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और 3 दिन के बाद वाराणसी सपरिवार चले गए या परिसर एक सांस्कृतिक धरोहर है जिससे वर्तमान में एक पुस्तकालय का संचालन किया जा रहा है |

नेहरू पार्क

गोरखपुर नगर के व्यस्ततम बाजार साहबगंज में हावर्ड बांध के किनारे इस्माइल पार्क तत्पश्चात लाल डिग्गी पार्क स्थित हैं 3 जून 1940 को जवाहर लाल नेहरू को इसी पार्क में भाषण के पश्चात तत्कालीन कलेक्टर ने गिरफ्तार किया था वर्तमान में यह पाक अपनी सैलानियों को अपनी भव्यता से उत्कृष्ट करता है|

रीड साहब का धर्मशाला

नगर के बेतियाहाता चौराहे के पास निर्मित रेड साहब के धर्मशाला में गोरखपुर के चकले द्वारका जी खलीलुर रहमान ने मुगल सिपहसालार के रहने के लिए सन 1680 में इस दुर्ग का निर्माण कराया था | 1839 में गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर साहब ने ₹5880 एक आना तत्कालीन रईसु एवं व्यापारियों से चने लेकर इस ग्रुप को धर्मशाला का रूप दिया |

घंटाघर

महानगर में उर्दू बाजार स्थित घंटाघर देशभक्त वीरों का गौरव गाथा का यादगार है | घंटाघर के स्थान पर पतलू के पेड़ पर अली हसन और तमाम देशभक्तों को 31 मार्च अट्ठारह सौ उनसठ को फांसी दी गई थी | उसी स्थान पर सेट रामखेलावन और ठाकुर प्रसाद ने 1930 में घंटाघर का निर्माण कराया |

बसंतपुर सराय

राजा बसंत सिंह ने सन् 1456 ईस्वी में बसंतपुर किले का निर्माण कराया| सन 1688 में काजीपुर खलीलुर रहमान गोरखपुर के चौकीदार नियुक्त हुए और बसंतपुर किले में मुगल पलटन रहने लगी | इस किले का कुछ हिस्सा खलीलुर रहमान ने कैदियों के लिए कारागार के रूप में काम में लाया 1801 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस कैद खाने का नाम मोतीझील रखा |

सेंड जोसेफ चर्च

फादर रफले 1860 में प्रथम कैथोलिक मिशनरी वालों के लिए सेंट जोसेफ चर्च का निर्माण कराया 150 साल पुराने चर्च की भव्यता सरदारों को अभी भी आकर्षित करती है |

सेन्ट मार्कस चर्च

सन 1854 में रेवरेंड एच स्टर्न गोरखपुर आए और लगभग 40 वर्षों तक गोरखपुर में रहे 1881 में उन्होंने स्टर्नपुर ग्राम बसाया | 1882 में उन्होंने जौनपुर में सेंट मार्कस चर्च की स्थापना की अपनी मान्यता के साथ आज भी खड़ा है |

बसंतपुर की संगी मस्जिद

सन 1680 औरंगजेब के शासनकाल में काजी खलीलुर रहमान ने इसका निर्माण कराया या मस्जिद तत्कालीन वास्तुकला का आकर्षण का नमूना तथा दर्शनीय है |

गीता वाटिका

महानगर के शाहपुर क्षेत्र में गीता वाटिका स्थित है वास्तव में भाई जी श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार इस स्थान पर निवास करते थे | 1974 में उनके स्वर्गवास के पश्चात हनुमान प्रसाद स्मारक समिति समिति ने उनकी पावन स्मृति में गीता वाटिका की स्थापना की |